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भगवान केदारनाथ शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

भगवान केदारनाथ शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान हो गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजा-अर्चना के साथ बाबा केदार की भोगमूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। इस पावन दृश्य के सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने। इस दौरान पूरा क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा।

शुक्रवार सुबह नौ बजे भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली ने विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया। भैंसारी गांव होते हुए होते हुए डोली सुबह 11 बजे विद्यापीठ पहुंची। जहां पर राजकीय महाविद्यालय व आयुर्वेदिक कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने डोली का स्वागत किया। यहां से डोली जैयवीरी पहुंची, जहां पर अरुण महाराज एवं चुन्नी गांव के ग्रामीणों ने भगवान केदारनाथ का स्वागत किया। ग्रामीणों ने अपने आराध्य को सामूहिक अर्घ्य भी लगाया। यहां से देवदर्शनी होते हुए बाबा की चल उत्सव विग्रह डोली दोपहर 12.15 बजे पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। मंदिर परिसर में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डोली की अगवानी करते हुए पुष्प व अक्षत से बाबा केदार का स्वागत कर घर-परिवार की सुख-समृद्धि की मनौती मांगी। इस मौके पर पूरा ऊखीमठ क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा।

चल उत्सव डोली के ओंकारेश्वर मंदिर की परिक्रमा के बाद पुजारी शिव शंकर लिंग ने डोली की आरती उतारी। इसके बाद डोली को परंपरानुसार पंचकेदार गद्दीस्थल में विराजमान किया गया। जहां पर रावल भीमाशंकर लिंग ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए स्वर्ण मुकुट धारण किया। साथ ही केदारनाथ में पुजारी रहे शिव लिंग ने रावल को भोगमूर्ति व नागताला सौंपा। मंदिर के वेदपाठियों ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ भगवान केदारनाथ की भोगमूर्तियों को छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया। इस मौके पर रविग्राम के पंथेर पुजारी ने केदारनाथ से लाया गया उदक जल और भस्म को भक्तों को प्रसाद रूप में वितरित की।

परंपरानुसार शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए बाबा केदार की डोली के ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होने के बाद भोगमूर्ति के सिर पर विराजमान स्वर्ण मुकुट को उतार दिया गया। विधि-विधान के साथ इस स्वर्ण मुकुट को केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने धारण किया। अब शीतकाल के छह माह तक बोलंदा केदार के रूप में रावल अपने गृह क्षेत्र कर्नाटक सहित देश के विभिन्न राज्यों का भ्रमण कर केदारनाथ की महिमा का प्रचार-प्रसार करेंगे। साथ ही श्रद्धालुओं को यात्राकाल में बाबा केदार के दर्शनों लिए आमंत्रित करेंगे।

भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर आगमन पर ओंकारेश्वर मंदिर में पंचगाईं हक-हकूकधारी समिति ने केदार महोत्सव का आयोजन किया। इस मौके पर केदारनाथ यात्रा के बेहतर संचालन के लिए तहसीलदार दीवान सिंह राणा को सम्मानित किया गया। साथ ही यात्रा में डोली को धाम ले जाने व वापस शीतकालीन गद्दी स्थल लाने में सहयोग करने वाले हक-हकूकधारियों, सेना के जवानों, पुलिस और महिला मंगल दल व भजन कीर्तन मंडलियों को सम्मानित किया गया।

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