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लगातार बारिश और ठंड के बीच भी 33वें दिन धरना जारी, पूर्व सैनिकों का अडिग संकल्प

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

पिथौरागढ़।
130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। प्रतिकूल मौसम लगातार बारिश और कड़ाके की ठंड के बावजूद धरना शनिवार को 33वें दिन भी पूरे जोश, जज्बे और दृढ़ संकल्प के साथ जारी रहा, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह विरोध अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

धरनास्थल पर आज पुंगराऊँ घाटी क्षेत्र से पहुंचे पूर्व सैनिकों ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए स्पष्ट कहा कि यह संघर्ष अब केवल एक क्षेत्र या संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सीमांत क्षेत्र की आवाज बन चुका है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी परिस्थिति में पीछे हटना स्वीकार नहीं होगा और जब तक विस्थापन का आदेश निरस्त नहीं किया जाता, आंदोलन और अधिक तेज व व्यापक स्तर पर जारी रहेगा। पूर्व सैनिकों ने इसे “ज्वाला” की संज्ञा देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में यह पूरे प्रदेश में फैल सकता है।

धरने के दौरान पूर्व सैनिकों में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश भी खुलकर सामने आया। वक्ताओं ने कहा कि कई पूर्व सैनिक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए भी रोजाना दवाइयों के सहारे धरने में डटे हुए हैं, जो उनके संकल्प और आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है। इसके लिए उन्होंने सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जिन सैनिकों ने देश की सीमाओं पर अपना जीवन दांव पर लगाया, आज वही अपने सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं।

33 दिन बीत जाने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल न होने पर भी पूर्व सैनिकों में नाराजगी स्पष्ट दिखी। संगठन ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक ओर सैनिकों के नाम पर बड़े-बड़े वादे और “सैन्य प्रदेश” जैसे सपने दिखाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व सैनिकों की मूलभूत मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

पूर्व सैनिक संगठन ने बताया कि आंदोलन को प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगातार समर्थन मिल रहा है और अन्य जिलों के पूर्व सैनिकों से संपर्क कर इसे और अधिक सशक्त बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने से सरकार पर दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

इसी क्रम में रविवार को प्रस्तावित रक्षा मंत्री के हल्द्वानी दौरे को आंदोलन के लिए अहम अवसर के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व सैनिक इस मुद्दे को उनके समक्ष प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे आंदोलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। संगठन का मानना है कि यह मामला अब प्रदेश और केंद्र स्तर पर निर्णायक स्थिति में पहुंच चुका है और आने वाले समय में सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना ही होगा।

धरने में आज सूबेदार मेजर उमेद सिंह कार्की, केशर सिंह महरा, कैप्टन ललित सिंह (सेना मेडल), भगवान सिंह, आनंद सिंह, केदार सिंह, हयात सिंह, नवीन गुरुरानी सहित अनेक पूर्व सैनिक मौजूद रहे। इसके अलावा सीनियर सिटीजन संगठन से गोविन्द सिंह बिष्ट, गिरधर सिंह बिष्ट और गिरधर सिंह खनका ने भी पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।

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