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हर्षिल घाटी के बगोरी गांव में 15 दिवसीय “वाइब्रेंट विलेज नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम” सम्पन्न

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में “वाइब्रेंट विलेज नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम” एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। हर्षिल घाटी स्थित बगोरी गांव में शुक्रवार को 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण और गरिमामय वातावरण में हुआ। पंचायत भवन बगोरी में आयोजित समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

समारोह में प्रभागीय वनाधिकारी डी. पी. बलूनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड पर्यटन विभाग एवं पर्यटन और आतिथ्य कौशल परिषद के सहयोग से किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में हर्षिल घाटी और उत्तरकाशी जनपद के विभिन्न गांवों मुखवा, बगोरी, धराली, वीरपुर डुंडा, झाला, सुक्की, रणारी, जसपुर, बारसाली और सिंगोट सहित आसपास के क्षेत्रों के 40 युवाओं ने भाग लिया। 15 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को क्लासरूम अध्ययन के साथ-साथ व्यवहारिक और फील्ड आधारित प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गर्तांग गली और मुखवा ट्रैक का भ्रमण कराया गया, जहां उन्हें हिमालयी जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति, ट्रेकिंग मार्गों, इको-टूरिज्म और जिम्मेदार पर्यटन से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को प्रकृति आधारित पर्यटन गतिविधियों से जोड़ते हुए उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना रहा।

प्रशिक्षण के दौरान देश और विदेश के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. शेख नवाज अली, एबरडीन यूनिवर्सिटी स्कॉटलैंड की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. लिडिया सैम, कच्छ विश्वविद्यालय गुजरात की प्रोफेसर डॉ. सीमा बी. शर्मा तथा बीएसआईपी लखनऊ के प्रोजेक्ट एसोसिएट बेंजामिन सी. सैम ने प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। इसके अलावा हर्षिल घाटी के रेंजर आदेश यशवंत चौहान ने वन संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और जिम्मेदार प्रकृति पर्यटन को लेकर विशेष व्याख्यान दिया।

विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी, वनों की कटाई से उत्पन्न चुनौतियों, पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, सतत पर्यटन, पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। कई विशेषज्ञों ने ऑनलाइन और वर्चुअल माध्यम से भी प्रतिभागियों को संबोधित किया, जिससे प्रशिक्षण कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और व्यापक दृष्टिकोण का लाभ मिला।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि स्थानीय महिलाओं और जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्राम प्रधान बगोरी रंजीता डोगरा सहित स्थानीय ग्रामीणों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान गांवों में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को लेकर सकारात्मक माहौल बना रहा।

मुख्य अतिथि डी. पी. बलूनी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवा भविष्य में उत्तराखंड की पर्यटन पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशिष्ट अतिथि पूनम चंद ने कहा कि “वाइब्रेंट विलेज” पहल के माध्यम से सीमांत गांवों को पर्यटन और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है और स्थानीय युवाओं की भागीदारी इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।

कार्यक्रम का संचालन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का क्रियान्वयन समर्पित मीडिया सोसाइटी के पंकज शर्मा द्वारा किया गया। समारोह में विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय ग्रामीण और प्रशिक्षण से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह और ऊर्जा आकर्षण का केंद्र बनी रही।

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