पंतनगर।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर में इन्फ्लिबनेट सेंटर गांधीनगर, गुजरात के सहयोग से ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस)’ एवं इन्फ्लिबनेट सेवाओं पर एक दिवसीय उपयोगकर्ता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शोध, शिक्षा और डिजिटल संसाधनों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया उपस्थित रहे, जबकि कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इन्फ्लिबनेट सेंटर से डॉ. कृति जे. त्रिवेदी एवं श्री राजा वी ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. एस. सी. त्रिपाठी, डॉ. के. पी. सक्सेना, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक, शोधार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि नितिन सिंह भदौरिया ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालय केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से ज्ञान और शोध का बड़ा केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बिग डेटा और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकें शिक्षा एवं अनुसंधान व्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने प्रत्येक नगर और विकासखंड स्तर पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त पुस्तकालयों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को व्यापक लाभ मिलेगा।
कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने कहा कि डिजिटल रिपॉजिटरी और शोध संबंधी आंकड़ों तक त्वरित पहुंच किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध रैंकिंग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि ओएनओएस जैसी पहल देशभर के शिक्षण संस्थानों को एक समान शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इन्फ्लिबनेट सेंटर की डॉ. कृति जे. त्रिवेदी ने प्रतिभागियों को शोधगंगा, शोध चक्र सहित विभिन्न डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन प्लेटफार्मों के माध्यम से शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के शोध कार्यों और ई-संसाधनों तक सरल पहुंच उपलब्ध हो रही है। कार्यक्रम के दौरान ई-संसाधनों के लिए एक नए रिमोट एक्सेस प्लेटफार्म का भी शुभारंभ किया गया, जिससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और शोधकर्ता दूरस्थ स्थानों से भी डिजिटल सामग्री का उपयोग कर सकेंगे।
कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए लगभग 180 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को डिजिटल लाइब्रेरी सेवाओं, ऑनलाइन शोध संसाधनों और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।





