अदालत ने एक व्यक्ति और चार अन्य लोगों को 2022 में उसकी नौ साल की बेटी की बेरहमी से हत्या करने के लिए उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। यह हत्या एक ग्रामीण को झूठे मर्डर केस में फंसाने की साज़िश का हिस्सा थी। एडिशनल सेशन जज विजय कुमार हिमांशु ने सभी पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया और हर एक पर 22,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
अदालत ने लड़की के पिता अनीस को उसकी बची हुई ज़िंदगी भर के लिए कठोर कारावास (उम्रकैद) की सज़ा सुनाई और इस अपराध को बेहद क्रूर और अक्षम्य बताया। साथ ही, उसके साथियों शादाब, नसीम, सलीम और शहज़ादे को भी उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
अभियोजन अधिकारी देवेंद्र कुमार के अनुसार, शकील नाम के एक ग्रामीण ने अनीस और उसके भाई शादाब के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया था। वारंट जारी होने के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर शकील पर केस वापस लेने का दबाव डाला। कुमार ने बताया कि जब उसने इनकार कर दिया, तो आरोपियों ने उसे एक झूठे मर्डर केस में फंसाने की साज़िश रची और कथित तौर पर अनीस की नौ साल की बेटी अनाम का इस्तेमाल मोहरे के तौर पर किया। यह घटना 2 दिसंबर 2022 को हुई थी।
आरोपी अनाम को उर्स मेले में ले गए और लौटते समय एक खेत में उसे कथित तौर पर नींद की गोलियां खिला दीं। अभियोजन पक्ष ने बताया कि उसके बेहोश होने के बाद, अनीस ने उसके सिर पर ईंट मारी और फिर चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद लड़की के शव को पुआल में छिपा दिया गया।
कुमार ने बताया कि बाद में अनीस पुलिस स्टेशन गया और झूठी शिकायत दर्ज कराई कि उसकी बेटी लापता है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि हमले के बाद भी लड़की ज़िंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी और उसके पिता ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय कथित तौर पर उसका वीडियो बनाया।
पुलिस ने सबूतों, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं। जांच में बेगुनाह पाए जाने के बाद शकील का नाम हटा दिया गया और पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।


