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उत्तराखंड के ‘शुद्धीकरण’ विवाद की गूंज बेंगलुरु तक, बीजेपी नेताओं के खिलाफ जीरो FIR दर्ज

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Vijaya Dimri
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Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

हल्द्वानी/बेंगलुरु। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद सामने आए कथित ‘शुद्धीकरण’ विवाद ने अब कर्नाटक का रुख कर लिया है। बेंगलुरु के विधान सौध पुलिस थाने में शुक्रवार को इस मामले में जीरो FIR दर्ज की गई है। FIR में उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत अन्य लोगों के खिलाफ नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत धाराएं लगाई गई हैं।

यह मामला आदिवासी कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा की ओर से 31 अगस्त को दी गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, शिकायत पर कानूनी राय लेने के बाद 4 सितंबर को जीरो FIR दर्ज की गई। मामले को आगे की जांच के लिए संबंधित पुलिस थाने को भेजा जा सकता है।

शिकायत के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और अन्य लोगों ने इसी स्थान पर कथित ‘शुद्धीकरण अनुष्ठान’ किया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस अनुष्ठान के जरिए यह धारणा व्यक्त की गई कि खड़गे के कार्यक्रम में शामिल होने के कारण रामलीला मैदान ‘अशुद्ध’ हो गया था। शिकायत में इस कथित कृत्य को दलितों के प्रति भेदभाव से जोड़ते हुए आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सवाल उठाए थे। शिकायत में उनके बयानों का उल्लेख करते हुए आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की मांग का जिक्र किया गया है। कांग्रेस की ओर से इस घटना को दलितों के साथ कथित भेदभाव से जोड़कर सरकार और भाजपा पर निशाना साधा गया था।

पुलिस के अनुसार, कानूनी राय के बाद दर्ज जीरो FIR में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की धारा 7(1), 7(1)(c) और 7(1)(d), एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(u) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1)(b) लगाई गई हैं।

पुलिस ने बताया कि 31 अगस्त को प्राप्त लिखित शिकायत के आधार पर कानूनी राय ली गई, जिसके बाद 4 सितंबर को जीरो FIR दर्ज की गई। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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