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मुख्यमंत्री ने गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ मनाई दीपावली, अपने हाथों से खिलाई मिठाई

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं। उन्होंने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं और देश की रक्षा में उनके साहस, शौर्य और समर्पण के प्रति आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसा अनुभव हो रहा है। त्योहारों पर घर-परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा में तैनात रहना कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का उदाहरण है। जब देशवासी अपने परिवारों के साथ दीपावली मनाते हैं, तब जवान सीमाओं पर मुस्तैद रहकर उनकी सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। हमारे घरों में जलने वाले दीपों के पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी है।

धामी ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उनके पिता सेना में थे और उन्होंने उन्हें देशसेवा, अनुशासन व कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए। पिता गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। इनमें वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर अदम्य साहस दिखाने वाले महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत की वीरता का विशेष उल्लेख रहता था। मुख्यमंत्री ने जसवंत सिंह रावत सहित देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी सैनिकों को नमन किया।

उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवगाथा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता मजबूत हो रही है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सेनाओं के आधुनिकीकरण और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल, सुरंग तथा संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में नियुक्ति देने की व्यवस्था के तहत कई आश्रितों को नौकरी दी गई है। इसके लिए आवेदन की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है। देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। यह देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के शौर्य और त्याग का प्रतीक बनेगा।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर राम सिंह थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, मेजर केडी सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भण्डारी सहित सैन्य अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।

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