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भंगेली में 15 बच्चों में एचएफएमडी के लक्षण, आठ में कॉक्ससैकी वायरस की पुष्टि

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के भंगेली गांव में 15 बच्चों के बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जांच में आठ बच्चों में कॉक्ससैकी वायरस की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार वायरस से होने वाली बीमारी को हाथ, पैर और मुंह की बीमारी यानी एचएफएमडी के नाम से जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में अन्य बच्चों की भी जांच कर रही है और प्रभावित बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।

भटवाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. वेद मोइक के मुताबिक, बीमार बच्चों में हाथ, पैर और मुंह पर दाने निकलने के साथ तेज बुखार, गले में दर्द और भूख न लगने जैसी शिकायतें सामने आईं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर बच्चों की जांच की तो लक्षण एचएफएमडी बीमारी से मिलते-जुलते पाए गए। इसके बाद 15 बच्चों के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिनमें आठ में बीमारी की पुष्टि हुई।

स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के बीमार होने का संबंध दूषित पानी से बताया है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वायरस पेयजल स्रोत से आने वाले पानी में मौजूद था या संक्रमण किसी अन्य माध्यम से फैला। वहीं जल संस्थान ने पेयजल दूषित होने के दावे से इनकार किया है। विभाग की ओर से जल स्रोतों की निगरानी भी तेज कर दी गई है। पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के वास्तविक स्रोत की स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बताया जा रहा है कि एचएफएमडी बीमारी आमतौर पर सात वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखी जाती है। बच्चों में एक साथ संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में निगरानी और जांच का काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित बच्चों के उपचार और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

उत्तरकाशी जिले में वर्तमान में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। भंगेली गांव में जब एक साथ कई बच्चे बीमार हुए तो उनके उपचार के लिए फिजिशियन की मदद लेनी पड़ी। चिकित्सकों ने दूसरे जिलों के बाल रोग विशेषज्ञों से सलाह लेकर बच्चों का उपचार किया। इससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता का मुद्दा भी सामने आया है।

बच्चों के उपचार में बाल रोग विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि बच्चों की उम्र और शारीरिक विकास के अनुसार उपचार और दवाओं की खुराक निर्धारित करनी पड़ती है। ऐसे में जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता नहीं होने से गंभीर परिस्थितियों में स्वास्थ्य विभाग के सामने अतिरिक्त चुनौती खड़ी हो सकती है।

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