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देहरादून में 30वें ‘दिव्य कला मेला’ का हुआ भव्य उद्घाटन

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

रविवार को देहरादून के रेंजर्स मैदान में 30वें ‘दिव्य कला मेला’ का भव्य उद्घाटन हुआ। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से नि) श्री गुरमीत सिंह ने कहा- “दिव्य कला मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेरणा और उत्साह का एक सशक्त मंच है, जो भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में दिव्यांगजनों की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।” उन्होंने कहा कि यहां प्रदर्शित रचनात्मकता केवल कला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की जीवंत अभिव्यक्ति है।

उत्तराखंड के राज्यपाल ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचारों को दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों का सेतु बताते हुए कहा कि तकनीक किसी में भेदभाव नहीं करती। उन्होंने आह्वान किया कि मेले में निर्मित उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचाया जाए, ताकि दिव्य प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके। उनके अनुसार, संकल्प और सामर्थ्य के बल पर दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त आधार तैयार किया है। उन्होंने जानकारी दी कि चालू वर्ष के बजट में Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India के माध्यम से सहायक उपकरणों की खरीद और फिटिंग के लिए ₹375 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में लाभार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम में सांसद, टिहरी, माला राज्य लक्ष्मी शाह ने कहा कि दिव्य कला मेला जैसे आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक माध्यम हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन उत्तराखंड जैसे राज्यों को नई पहचान और ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से पैरालंपिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।

कार्यक्रम में विधायक खजान दास ने आयोजन को दिव्यांगजनों के सम्मान और अवसर का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई प्रदान करते हैं।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के निदेशक श्री प्रदीप ए. ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि यह मेला दिव्यांग उद्यमियों को बाजार, वित्त और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का समग्र प्रयास है। उन्होंने बताया कि मेले में सहायक उपकरणों हेतु पंजीकरण, विभिन्न संस्थाओं की जानकारी और रोजगार मेलों के माध्यम से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

देहरादून में आयोजित यह 30वां ‘दिव्य कला मेला’ देशभर में आयोजित मेलों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब तक 29 स्थानों पर आयोजित मेलों में लगभग 2362 प्रतिभागियों ने भाग लिया है और 23 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। सरकार ने दिव्यांग उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹20 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए हैं, जो आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रोजगार मेलों में अब तक लगभग 3131 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 1007 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से अधिक को रोजगार प्रस्ताव प्राप्त हुए।

इस नौ दिवसीय दिव्य कला मेले में लगभग 90 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें देश के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर, कलाकार और उद्यमी भाग ले रहे हैं। हस्तशिल्प, हथकरघा, कढ़ाई, होम डेकोर, वस्त्र, ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, आभूषण, खिलौने और उपहार सामग्री सहित विविध उत्पाद यहां उपलब्ध हैं। 26 फरवरी 2026 को विशेष रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा, जबकि 1 मार्च 2026 को ‘दिव्य कला शक्ति’ नामक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें दिव्यांग कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

21 फरवरी से 1 मार्च तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित इस मेले में प्रवेश निःशुल्क है। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, खेल गतिविधियां और सहायक उपकरणों के लिए पंजीकरण सुविधाएं इसे एक समावेशी, प्रेरक और सशक्त मंच बनाती हैं—जहां कला के माध्यम से आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई कहानी लिखी जा रही है।

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