हरिद्वार।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का रविवार को श्रद्धा, उत्साह एवं संकल्प के साथ समापन हो गया। शिविर में देशभर से आए शिक्षकों एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार से जुड़े कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चिंतन-मनन किया। कार्यक्रम में शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम न मानकर चरित्र निर्माण एवं समाज परिवर्तन का आधार बनाने पर विशेष बल दिया गया।
शिविर के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि शिक्षक ही युग निर्माता तथा राष्ट्र के भाग्य विधाता होते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापक केवल पाठ्य ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र, अनुशासन एवं जीवन मूल्यों का संवाहक होता है। यदि शिक्षक स्वयं आदर्श जीवन जिएं, संवेदनशीलता और अनुशासन का पालन करें, तो वे विद्यार्थियों के माध्यम से पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों, कर्तव्य बोध और राष्ट्र चेतना का विकास करना होना चाहिए।
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था तभी सार्थक मानी जाएगी, जब वह विद्यार्थियों को केवल सफल ही नहीं, बल्कि संस्कारित, जिम्मेदार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक भी बनाए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यालयों को केवल अध्ययन केंद्र न बनाकर संस्कार निर्माण की प्रयोगशाला के रूप में विकसित करें।
शिविर समन्वयक ने बताया कि शिक्षक गरिमा शिविर का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के अंत:करण में कर्तव्य बोध, नैतिक दायित्व एवं आदर्श शिक्षण संस्कारों को जागृत करना है, ताकि वे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण में भी प्रभावी भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के व्यक्तित्व एवं विचारों का सीधा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है, इसलिए शिक्षक समाज की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं।
दो दिवसीय शिविर के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को शिक्षा के बदलते स्वरूप, नैतिक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, संस्कारवान पीढ़ी निर्माण, भारतीय संस्कृति एवं जीवन प्रबंधन जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। शिविर में सहभाग कर रहे शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा को अधिक संस्कारमय, मूल्यनिष्ठ एवं समाजोपयोगी बनाने का संकल्प लिया।
समापन अवसर पर उपस्थित सभी शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र निर्माण एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया। शिविर में गुजरात प्रांत से आए लगभग 250 शिक्षकों तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार से जुड़े 50 कार्यकर्ता भाई-बहिनों ने सहभाग किया।





