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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना है।

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना है। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद आम लोगों में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पुराने एक्ट के मुकाबले विवाह पंजीकरण कराने वालों की प्रतिदिन की औसत संख्या में 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का संकल्प लिया था और सत्ता में आने के बाद उन्होंने यह संकल्प पूरा किया। मुख्यमंत्री धामी ने पहली कैबिनेट बैठक में ही राज्य में यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया। सभी औपचारिकताओं और व्यापक जनमत संग्रह के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून लागू कर दिया गया।

मुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक फैसला सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया साहसिक कदम है। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को, विशेष रूप से महिलाओं को, समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और इनसे जुड़े प्रावधानों को यूसीसी में शामिल किया गया है। इस कानून के तहत महिला एवं पुरुषों के लिए विवाह की आयु निर्धारित की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक एवं अन्य प्रक्रियाओं के लिए समान और कड़े प्रावधान किए गए हैं। यूसीसी के लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।

यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू होने के बाद जुलाई 2025 तक छह माह की अवधि में विवाह पंजीकरण की संख्या तीन लाख से अधिक हो गई है। वहीं, वर्ष 2010 में लागू पुराने अधिनियम के अंतर्गत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 064 विवाह पंजीकरण हुए थे। प्रतिदिन के औसत पर नजर डालें तो पुराने अधिनियम के तहत प्रतिदिन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई अभूतपूर्व वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उत्तराखण्ड ने पूरे देश को एक नई दिशा देने का कार्य किया है और मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।”

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