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बांग्लादेश की सऊदी-पाक-तुर्की डिफेंस पैक्ट में शामिल होने की संभावना

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

बांग्लादेश सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल ही में बने डिफेंस अलायंस (रक्षा गठबंधन) में शामिल होने पर विचार कर सकता है। दो जूनियर मंत्रियों ने यह बात कही है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि कोई भी फ़ैसला देश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

7 अगस्त को मक्का में साइन किए गए इस समझौते में सामूहिक सुरक्षा (डिटेरेंस) के लिए एक ढांचा तैयार किया गया है। इसमें यह भी तय किया गया है कि अगर इन तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

विदेश मामलों के नए राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा, “बांग्लादेश अपने हितों और ग्लोबल इकॉनमी व व्यापार में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के साथ किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना पर सकारात्मक रुख रखता है।”

शुक्रवार को सरकारी न्यूज़ एजेंसी BSS की बांग्ला सर्विस को दिए एक इंटरव्यू में कबीर ने कहा कि सरकार “बांग्लादेश फर्स्ट” (बांग्लादेश सबसे पहले) की नीति और राष्ट्रीय हितों पर आधारित संतुलित विदेश नीति अपना रही है, जिसके तहत ढाका इस डिफेंस पैक्ट में शामिल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सामान्य राजनयिक बातचीत के ज़रिए पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंध भी मज़बूत करेगा और व्यापार व लोगों के बीच आपसी संपर्क पर ध्यान देगा।

शुक्रवार को विदेश मामलों के दूसरे राज्य मंत्री के तौर पर नियुक्त किए गए कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर रियाद जाने की उम्मीद है और इस दौरे का शेड्यूल गर्मियों के बाद तय होने की संभावना है।

विदेश मामलों की एक और राज्य मंत्री, शामा ओबैद इस्लाम ने शुक्रवार को मीडिया से अलग बातचीत में कबीर की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि बांग्लादेश का राष्ट्रीय हित और उसके लोगों का हित ही इस समझौते में शामिल होने पर ढाका का रुख तय करेगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या बांग्लादेश इस त्रिपक्षीय ढांचे का हिस्सा बनेगा, तो उन्होंने कहा, “हम किसी समझौते या किसी बहुपक्षीय संस्था में शामिल होंगे या नहीं, यह मुख्य रूप से इस बात पर तय होगा कि बांग्लादेश और बांग्लादेशी लोगों के हितों की रक्षा हो रही है या नहीं।”

इन दो जूनियर मंत्रियों की ये टिप्पणियां रहमान के वित्त और योजना सलाहकार प्रोफ़ेसर राशिद अल महमूद टिटुमीर के उस बयान के दो दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति देश की विदेश नीति में एक “बड़ा बदलाव” (पैराडाइम शिफ्ट) है। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत, सभी देशों के साथ रचनात्मक और आपसी फ़ायदे वाले संबंध बनाए रखते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बांग्लादेश के जुड़ाव में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता, आपसी सम्मान और क्षेत्रीय सद्भाव को केंद्र में रखा गया है।

टिटुमीर ने कहा, “बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति का मतलब है बांग्लादेश के हितों को प्राथमिकता देना, लेकिन साथ ही ‘सभी के लिए बांग्लादेश’ की भावना भी रखना।”

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