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इस्लाम में हिजाब ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद HC ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ़ पहनने की याचिका खारिज की

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Vijaya Dimri
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Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रयागराज के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। छात्रा ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली थी और उसी स्कूल में 11वीं क्लास में एडमिशन लेना चाहती थी। अपनी माँ के ज़रिए, उसने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्कूल को निर्देश देने की मांग की कि उसे तय यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ़ पहनने की इजाज़त दी जाए। याचिका में तर्क दिया गया था कि हेडस्कार्फ़ पहनना इस्लामी परंपरा का एक ज़रूरी हिस्सा है और छात्रा छठी क्लास से ही उसी स्कूल में इसे पहनती आ रही थी।

एक न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की दो जजों की बेंच ने याचिका खारिज कर दी। बेंच ने कहा कि कोई भी स्टूडेंट अपनी पसंद के हिसाब से किसी एजुकेशनल इंस्टिट्यूट की तय यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकता।

कोर्ट ने हेडस्कार्फ़ को ज़रूरी इस्लामी परंपरा मानने के दावे को खारिज किया

बेंच ने याचिकाकर्ता की अलग-अलग क्लास की तस्वीरों को देखा और पाया कि वह हेडस्कार्फ़ पहनने वाली अकेली लड़की थी। कोर्ट ने देखा कि उसी धार्मिक समुदाय के दूसरे स्टूडेंट्स के मामले में भी ऐसा ही था।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि हेडस्कार्फ़ पहनना एक ज़रूरी धार्मिक परंपरा है। कोर्ट ने कहा कि जिन हाई कोर्ट्स ने इस मुद्दे पर विचार किया है, उन्होंने हमेशा यही माना है कि महिलाओं के लिए हेडस्कार्फ़ पहनना इस्लामी आस्था का ऐसा ज़रूरी हिस्सा नहीं है कि इसके न पहनने से आस्था खतरे में पड़ जाए। 21 अगस्त के अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह दावा कि हेडस्कार्फ़ पहनना एक ज़रूरी धार्मिक परंपरा है, महज़ एक “कोरा दावा” है।

प्राइवेट स्कूल यूनिफॉर्म ड्रेस कोड लागू कर सकते हैं

हाई कोर्ट ने कहा कि बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट को अपने परिसर में यूनिफॉर्म ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है, बशर्ते नियम निष्पक्ष हों, भेदभावपूर्ण न हों और उनका मकसद अनुशासन और समानता बनाए रखना हो। कोर्ट ने कहा कि तय यूनिफॉर्म का पालन करना ज़रूरी है और स्टूडेंट्स को यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ़ पहनने के लिए अलग से इजाज़त मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने आगे कहा कि अगर स्टूडेंट्स को अपनी पसंद के हिसाब से तय यूनिफॉर्म में बदलाव करने या उसे न मानने की इजाज़त दी जाती है, तो यूनिफॉर्म रखने का मकसद ही खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के रवैये से स्कूल का अनुशासन तय करने का अधिकार इंस्टिट्यूट के हाथ से निकलकर स्टूडेंट्स के हाथ में जा सकता है।

स्कूल, राज्य सरकार और CBSE ने याचिका का विरोध किया

स्कूल ने कोर्ट को बताया कि यह एक प्राइवेट, खुद से चलने वाला संस्थान है, जहाँ सभी छात्रों के लिए एक जैसा ड्रेस कोड लागू है। स्कूल ने यह भी कहा कि यहाँ अलग-अलग समुदायों के छात्र पढ़ते हैं और किसी एक छात्र को खास छूट देने से अनुशासन और एकरूपता पर असर पड़ सकता है।

राज्य सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने भी याचिका का विरोध किया। आखिरकार, हाई कोर्ट ने संस्थान के तय ड्रेस कोड को लागू करने के अधिकार को सही ठहराया और स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ़ पहनने की छूट मांगने वाली छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

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