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ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने की इस्तीफे की पेशकश, भाजपा ने बताया ‘चुनावी स्टंट’

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Vijaya Dimri
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Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) एवं निजी सचिव चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से इस्तीफे की पेशकश की है। इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा ने कांग्रेस और हरीश रावत पर तीखा हमला बोला है।

ईडी की कार्रवाई धन शोधन के एक मामले से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें 2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती मामले में OMR शीट्स में कथित हेरफेर और अनियमितताओं की जांच की जा रही है। कार्रवाई के दौरान 32 लाख रुपये से अधिक नकदी, करीब 200 ग्राम सोना और रोलेक्स व राडो जैसी लक्जरी घड़ियों समेत 12 घड़ियां बरामद होने की बात सामने आई है। इसके बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे की पेशकश की।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हरीश रावत के रुख पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन अपनी पार्टी के भीतर स्थिति मजबूत करने और जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए इस तरह के कदम उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा उस दिन का इंतजार कर रही है जब हरीश रावत कांग्रेस को पूरी तरह अलविदा कहेंगे।

ईडी की कार्रवाई को चुनावी समय से जोड़कर देखे जाने के आरोपों पर महेंद्र भट्ट ने कहा कि ईडी एक स्वायत्त जांच एजेंसी है और उसकी कार्रवाई लगातार चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यूकेएसएसएससी भर्ती प्रक्रिया में शुरू से ही अनियमितताओं के आरोप रहे हैं। यदि जांच के दौरान किसी के ठिकाने से अवैध संपत्ति या महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद होते हैं तो कांग्रेस को इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी गलत करेगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने ईडी की कार्रवाई को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ने को गलत बताया।

वहीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने भी हरीश रावत की इस्तीफे की पेशकश पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नैतिक आधार पर इस्तीफा देना हो तो उसकी पेशकश नहीं की जाती, बल्कि सीधे इस्तीफा दिया जाता है। चमोली ने आरोप लगाया कि माहौल बनाने और दबाव की राजनीति के लिए इस्तीफे की पेशकश करना हरीश रावत का पुराना तरीका रहा है।

विनोद चमोली ने कहा कि मुख्यमंत्री का OSD सरकार का सीधा प्रतिनिधि होता है और यदि किसी पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल से जुड़े अधिकारी के परिसरों से बड़ी मात्रा में संपत्ति और अन्य सामान बरामद होता है तो इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने इसे कांग्रेस शासनकाल में कथित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा।

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के भीतर हरीश रावत की स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस में नया नेतृत्व उभर रहा है और हरीश रावत पार्टी के भीतर अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उन्होंने यशपाल आर्य समेत कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा ‘एक परिवार-एक टिकट’ की पैरवी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि परिवार के लिए टिकट की राजनीतिक संभावनाएं प्रभावित होने के कारण हरीश रावत इस्तीफे की पेशकश कर रहे हैं।

2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती मामले में OMR शीट्स में कथित हेरफेर और धांधली के आरोपों को लेकर भी भाजपा ने कांग्रेस को घेरा। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ने के साथ यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा ईडी की कार्रवाई को जांच की सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साध रही है, वहीं हरीश रावत की इस्तीफे की पेशकश ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

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