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यूकेडी ने वरुणावत प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की

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Vijaya Dimri
Vijaya Dimrihttps://bit.ly/vijayadimri
Editor in Chief of Uttarakhand's popular Hindi news website "Voice of Devbhoomi" (voiceofdevbhoomi.com). Contact voiceofdevbhoomi@gmail.com

उत्तरकाशी। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय महामंत्री एवं अधिवक्ता किरण रावत ने वरुणावत ट्रीटमेंट कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में वरुणावत पर्वत पर हुए भूस्खलन के बाद प्रभावित क्षेत्र के उपचार और सुरक्षा कार्यों के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2004 में 282.53 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी न तो ट्रीटमेंट कार्य पूरी तरह पूरा हो पाया और न ही स्थानीय लोगों को स्थायी सुरक्षा मिल सकी।

जारी बयान में किरण रावत ने कहा कि स्वीकृत धनराशि में से 13.22 करोड़ रुपये तंबाखानी टनल निर्माण के लिए, 2.50 करोड़ रुपये जिला पंचायत परिसर के लिए, 11.08 करोड़ रुपये मोरी-नेटबाड़-सांकरी मोटर मार्ग के लिए, 3.32 करोड़ रुपये जिला निर्वाचन कार्यालय एवं एनआईसी भवन के लिए, 1.26 करोड़ रुपये उद्यान विभाग की कॉलोनी के लिए, 2.73 करोड़ रुपये मोरी क्षेत्र के कल्प गांव के लिए ढोला में झूला पुल निर्माण के लिए तथा 1.61 करोड़ रुपये नगर पालिका के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए खर्च किए गए। उन्होंने दावा किया कि 5.01 करोड़ रुपये कार्य पूरे न होने के कारण सरेंडर भी कर दिए गए थे।

किरण रावत ने कहा कि इसके बाद वर्ष 2007 में वरुणावत ट्रीटमेंट के लिए 70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त हुई तथा बाद में 6 करोड़ रुपये और स्वीकृत किए गए, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्र का उपचार कार्य पूर्ण नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रीटमेंट के लिए मिली धनराशि का बड़ा हिस्सा मूल उद्देश्य पर खर्च करने के बजाय जिले के अन्य कार्यों में लगा दिया गया, जिसके कारण आज तक समस्या बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि तंबाखानी टनल, जिसे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था, आज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। टनल के भीतर कई स्थानों पर लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद टनल की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

यूकेडी नेता ने बड़थी-टेखला वैकल्पिक राजमार्ग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के निर्माण के लिए लगभग 52 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई, लेकिन वर्षों बाद भी यह मार्ग पूरी तरह तैयार नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सभी परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी जांच कराई जाए तो धनराशि के उपयोग से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

किरण रावत ने कहा कि तत्कालीन विधायक, मंत्री, जिला प्रभारी मंत्री और उस समय के अन्य जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार वरुणावत ट्रीटमेंट के नाम पर खर्च की गई धनराशि के बावजूद आज भी क्षेत्र में पत्थर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। वरुणावत की तलहटी में रहने वाले लोगों को विशेषकर बरसात के मौसम में लगातार भय के माहौल में जीवन बिताना पड़ता है और रातों की नींद हराम हो जाती है।

उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाती है तो दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की पड़ताल में ही लंबा समय लग सकता है, क्योंकि वर्षों के दौरान विभिन्न मदों में बड़ी मात्रा में धनराशि खर्च की गई है। सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि ट्रीटमेंट कार्यों के लिए प्राप्त धनराशि का उपयोग किस प्रकार और किन-किन कार्यों में किया गया।

यूकेडी के केंद्रीय महामंत्री ने राज्य सरकार से पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने, जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विकास और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, क्योंकि इन योजनाओं पर खर्च होने वाला धन जनता के करों से प्राप्त होता है। साथ ही उन्होंने लोगों से भी सार्वजनिक धन के उपयोग और विकास योजनाओं की निगरानी के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

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