उत्तरकाशी। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की अध्यक्षता में जिला सभागार में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के लंबित आवेदनों के निस्तारण को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण एवं सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला स्तरीय उत्तराखंड राज्य चिन्हीकरण सलाहकार समिति के सदस्यों की मौजूदगी में कुल 68 प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन प्रकरणों में विरोधाभास की स्थिति है, उनके संबंध में शासन से दिशा-निर्देश प्राप्त किए जाएंगे, ताकि लंबित मामलों का निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से निस्तारण किया जा सके।
बैठक में सीएमएस डॉ. बीएस रावत, एडीएम मुक्ता मिश्र, एसडीएम शालिनी नेगी, देवानंद शर्मा, बृजेश तिवारी, मुकेश चंद रमोला सहित समिति के पदाधिकारी आनन्द सिंह पंवार, देवेन्द्र सिंह नेगी, कीर्तिनिधि सजवान, विजेन्द्र प्रसाद जगूड़ी, बालगोविन्द डोभाल और राजेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।
इसी क्रम में आगामी मानसून काल को देखते हुए जिले में संभावित अतिवृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ तथा नदियों के जलस्तर बढ़ने जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की अध्यक्षता में वर्चुअल बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को मानसून से पूर्व सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए।
वर्चुअल बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून काल में पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है, इसलिए जीवन रेखा से जुड़े सभी विभाग अपने-अपने संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित रखें। उन्होंने सड़क से जुड़े विभागों को निर्देशित किया कि चिन्हित संवेदनशील और भूस्खलन संभावित डेंजर जोन में मशीनरी के साथ पर्याप्त मानव संसाधन की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि सड़क अवरुद्ध होने की स्थिति में उसे शीघ्र खोला जा सके।
जिलाधिकारी ने बीआरओ और एनएच अधिकारियों को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित होने की स्थिति में तत्काल यातायात सुचारू किया जाए तथा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखे जाएं। उन्होंने निर्माण कार्यों के दौरान तथा डेंजर जोन क्षेत्रों में, जहां पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है, वहां चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश भी कार्यदायी संस्थाओं को दिए। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने को कहा गया।
मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में राशन, घरेलू गैस तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी न हो, इसके लिए जिला पूर्ति अधिकारी को अग्रिम रसद पहुंचाने के निर्देश दिए गए। साथ ही पेट्रोल पंपों पर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने तथा पशुपालन विभाग को पशुओं के चारे और आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण रखने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने विद्युत एवं पेयजल विभाग को मानसून काल में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली और पेयजल लाइनों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में त्वरित मरम्मत कार्य के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखे जाएं। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को नालियों एवं नालों की नियमित साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए गए, ताकि बरसात के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो।
बैठक में तहसील स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम को सक्रिय बनाए रखने तथा नदियों के जलस्तर की सतत निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए। बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में अर्ली वार्निंग सिस्टम को सक्रिय रखने पर भी जोर दिया गया।
वर्चुअल बैठक में एडीएम मुक्ता मिश्र, एसडीएम शालिनी नेगी, बृजेश तिवारी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं, जय पंवार सहित पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी के अधिकारी मौजूद रहे।




